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संदेश

संस्कृति आदान-प्रदान में मीडिया की भूमिका

                                      संस्कृति आदान-प्रदान में मीडिया की भूमिका हमारा देश आज संक्रमण के दौर से गुजर रहा है । वैश्वीकरण ने एक ओर अमरीकी डालर का तथा दूसरी ओर अंग्रेजी भाषा का महत्व बढ़ा दिया है । चूंकि हमारी शिक्षा में मानसिक परिपक्वता को स्थान नहीं है ,  अत :  हम एक प्रवाह में पड़ गए । आंखें मूंदकर चले ही जा रहे हैं । अच्छे - बुरे अथवा उपादेय एवं हेय का भेद करना भूल गए । शिक्षित समाज धीरे - धीरे भारतीय संस्कृति से और स्वयं अपनी आत्मा से दूर होता जा रहा है । अभी इनकी संख्या बहुत कम है ,  किन्तु इनका झुकाव अंग्रेजी संस्कृति एवं जीवन दर्शन की ओर दिखाई पड़ता है । ये ही लोग देश के नीति - निर्माता भी हैं ।           परिणाम यह होता है कि जब भी कोई नीति संस्कृति में बदलाव की बात कहती है ,  तब टकराव की एक स्थिति बन जाती है । अधिकांश देशवासी मूल अवधारणाओं में बदलाव नहीं चाहते । नई संस्कृति इन मर्यादाओं को तोड़ती हुई ...

राज्यसभा के नये उपसभापति के चुनाव का मीडिया कवरेज

राज्यसभा के नये उपसभापति के चुनाव का मीडिया कवरेज प्रभात खबर के पूर्व प्रधान संपादक सह जदयू के राज्यसभा सदस्य हरिवंश गुरुवार को उच्च सदन के उपसभापति पद के लिए चुन लिए गए हैं। उन्हें विपक्ष की ओर से कांग्रेस के उम्मीदवार बीके हरिप्रसाद को 105 वोट के मुकाबले 125 वोट मिले। इस तरह एनडीए के हरिवंश ने यूपीए के हरिप्रसाद को 20 वोटों से हरा दिया। राज्यसभा में इस वक्त 244 सांसद हैं। हालांकि, वोटिंग के समय 232 सांसद ही सदन में उपस्थित थे ।इनमें से 230 ने ही वोटिंग में हिस्सा लिया ।दो सदस्यों ने अपना वोट नही डाला ।बता दे कि 1977 से लगातार कांग्रेस का उम्मीदवार ही उपसभापति बनता रहा है। इस लिहाज से एनडीए की यह जीत बेहद अहम है। तमाम कोशिशों के बावजूद विपक्ष की रणनीति फेल हो गयी । मौजूद कुल सीट : 244 वोटिंग : 230    बहुमत  : 116                    हरिवंश : 125   बीके हरिप्रसाद : 105 भाजपा    73                              ...

उर्दू साप्ताहिक ‘स्वराज’ की पत्रकारिता

उर्दू साप्ताहिक ‘ स्वराज ’ की   पत्रकारिता उर्दू साप्ताहिक ‘ स्वराज ’ कि पत्रकारिता कि अवधि ढाई साल थी इसके कुल प्रकाशित अंक 75 और कुल संपादक 08 थे। इस अखबर में सभी संपादकों को मिला कर और देश निकाला- 94 वर्ष 09 माह। किसी समाचार पत्र को अभिव्यक्ति स्वातंत्र्य कि इतनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी होगी ? किसी अखबार के संपादक कि पदवी काँटों का ऐसा ताज सिद्ध हुई ? सारी दुनिया कि पत्रकारिता के इतिहास में ऐसा दूसरा प्रसंग दुर्लभ ही नहीं , लगभग असंभव है। लेकिन संघर्षों कि यह सत्य कथा 1907 ई. में इलाहाबाद से प्रकाशित उर्दू साप्ताहिक ‘ स्वराज ’ की आपबीती है। इसके संस्थापक संपादक शांतिनरायण भटनागर थे। भारतमाता सोसाइटी इलाहाबाद ने इसका प्रकाशन किया था। पृष्ट संख्या थी आठ और वार्षिक शुल्क 4 रुपये था। स्वराज का ध्येय वाक्य था। “हिंदुस्तान के हम हैं , हिंदुस्तान हमारा है।“ इसके आदि संपादक शांतिनारायण भटनागर पलहे लाहौर से प्रकाशित हिंदुस्तान के संपपादक रह चुके थे। तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियाँ , वातावरण की सरगर्म बनाए हुए थी। बंगाल के विभाजन के विरोध में बंग- भंग आंदोलन चल रहा था ऐसे माहौल...

संचार शोध

संचार शोध  संचार शोध में जिन संचार शास्त्री या प्रतिरूपों से मदद ली जाती है,उनमें बिल्वर श्रेम प्रमुख सिंद्धान्तकार हैं। बिल्वर श्रेम ने 1964 मास मीडिया एंड नेशनल डेवलोपमेन्ट में 1977 में बिग इंडिया और लिटिल मीडिया में भारत के विकास को सामने रखकर जनसंचार माध्यमों की विकास मूलक भूमिका को एक मुक्कमल आधार दिया। हमारे यहां भूमिका की लेकर बहस होती रहीं है और शोध भी, नेहरू ने अपनी पुस्तक डिस्कवरी ऑफ इंडिया में अपनी व्यक्तिगत विचार व्यक्त की है।और उन विचार पर बहुत से शोध किये गए हैं। तकनीक के विकास मूलक उपयोग और रचनात्मक विकास का सवाल भी मूलतः संचार माध्यमों से विचार मूलक शब्द जुड़ा हुआ है। भारत में रेडियो और टेलीविजन को लेकर दो विचार रहे हैं।एक के अनुसार  ये माध्यम शिक्षा और मनोरंजन के माध्यम हैं।दूसरे के अनुसार  रेडियो और टेलीविजन का विकास फालतू का विकास है। बिल्वर श्रेम ने रेडियो और टेलीविजन की विकास मूलक भूमिका सबसे पहले भारत को ही अपना उदाहरण बनाया।अगर हम बिल्वर श्रेम जैसे संचारकों को आधार माने तो संचार के क्षेत्र में क्या प्रश्न बन सकते हैं । शोध प्रश्न 1. किसी समाज में...

कलाकृतियों को सम्भालने कि जरुरत

कलाकृतियों को सम्भालने कि जरुर चित्र चाहे कैनवास पर हो या कागज पर हो । चाहे वह ऑयल कलर्स हो या जलरंगों , एक्रिलिक , पैस्टल से बना हो या चारकोल , पेंसिल से , उसे कई प्रकार से सुरक्षित रखने की जरूरत होती है। उसे छूने की मनाही होती है। जरूरत केअनुसार उसे फ्रेम में बांधा जाता है। धूप - पानी हवा से बचाया जाता है। तेजबल्बों की रोशनी से दूर रखा जाता है। उसे दीवार पर सही तरीके से टांगा जाताहै । यह सारी सावधानी बरतनी चाहिए। इस सावधानी का नतीजा यह होगा कि हम आठ या नौ शताब्दी तक कलाकृतियों को सुरक्षित देख पा रहे हैं । अगर यह सावधानी नही बरती गई , तो वहां हजारों की संख्या में कलाकृतियां नष्ट होगयी हैं। आज परिवेश में इन्हें सुरक्षित रखने से ही कला-संग्रहालयों की स्थापना हुई है। कला प्रेमियों ने चित्रों की प्रदर्शनी के बारे में सोचा है। कलाकारों औरशोधकर्ताओं ने इस पर बाकायदा काम किया है , की किस विधि से , कौन - सी सामग्री बरती जाए कि चित्र लंबे समय तक दीर्घायु रहे। वह कलाकार के जाने केबाद भी हजारों वर्षों तक जीवित रहें। अब तो कलाकृतियों को एक विशेषज्ञता वाला कोर्स बन चुका है। इन सभी कलाकृतियो...

जनसंपर्क की अवधारणा क्षेत्र एवं कार्य

                                        जनसंपर्क की अवधारणा क्षेत्र एवं कार्य                                                           जनसंपर्क संचार की एक प्रक्रिया है ,   जिसमें जनता से संचार स्थापित किया जाता है। यह एक जटिल और विभिन्न क्षेत्रों की सम्मिश्रित प्रक्रिया है। इसमें प्रबंधन ,   मीडिया , संचार और मनोविज्ञान जैसे विषयों के सिद्धांत और व्यवहार शामिल है। जनसंपर्क की प्रक्रिया एक सुनिश्चित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए की जाती है ,   जो एक सही माध्यम के द्वारा जनता से संपर्क स्थापित कर अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए सही दिशा में अग्रसर होने में सहायक होती है। जनसंपर्क ऐसी प्रक्रिया है ,   जो सम्पूर्ण सत्य एवं ज्ञान पर आधारित सूचनाओं के आदान - प्रदान के लिए की जाती हैं। जनसंपर्क दो शब्दों   ‘...